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मेरठ प्रकरण: भारतीय किसान यूनियन लोकहित परिवार के पदाधिकारियों को किया गया नज़रबंद, संगठन ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

पुष्पेंद्र कुमार संपादक गौतम बुद्ध नगर यूपी

मेरठ प्रकरण को लेकर भारतीय किसान यूनियन लोकहित परिवार के कई प्रमुख पदाधिकारियों को प्रशासन द्वारा नज़रबंद किए जाने का मामला सामने आया है। संगठन का आरोप है कि सरकार आंदोलन की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

 

संगठन के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष चौ. दिग्विजय यादव, प्रदेश अध्यक्ष शिंटू त्यागी, युवा प्रदेश अध्यक्ष (अल्पसंख्यक मोर्चा) यासिर चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रवीण पाल, गौतम बुद्ध नगर के जिला अध्यक्ष शिवम राठी, गाजियाबाद के जिला अध्यक्ष सुनील यादव, युवा जिलाध्यक्ष रिंकू जी, पंकज शर्मा एडवोकेट, जिला उपाध्यक्ष इंतजार अब्बासी सहित अन्य पदाधिकारियों को प्रशासन ने उनके आवासों पर नज़रबंद कर दिया।

 

भारतीय किसान यूनियन लोकहित परिवार ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे सरकार का तानाशाही रवैया बताया है। संगठन का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई के माध्यम से आंदोलनकारियों की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

 

संगठन ने सरकार से नज़रबंद किए गए सभी पदाधिकारियों को तत्काल रिहा करने तथा लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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