उत्तर प्रदेशग्रेटर नोएडा

निक्की भाटी केस में सुलह पंचायत के बाद परिवारों में हुआ समझौता बच्चों के नाम होगी संपत्ति, बहन जाएगी ससुराल

Rahul Kumar Chief Editor News Speed Live

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सिरसा गांव के चर्चित निक्की भाटी मौत मामले में अब नया मोड़ आ गया है। दहेज हत्या के आरोपों और गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में आए इस मामले में अब दोनों पक्षों के बीच पंचायत के जरिए समझौता हो गया है। समझौते के तहत निक्की भाटी के बच्चों के नाम संपत्ति किए जाने और परिवार को आर्थिक सहयोग देने पर सहमति बनी है। साथ ही निक्की की बहन कंचन को दोबारा ससुराल भेजने का फैसला भी लिया गया है।

 

परिजनों का कहना है कि कोर्ट में एफिडेविट देकर केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। इस समझौते को लेकर इलाके में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे गलत बता रहे हैं, जबकि कई लोग बच्चों के भविष्य को देखते हुए इसे सही कदम मान रहे हैं।

पिछले साल हुई थी निक्की भाटी की मौत

सिरसा गांव में 21 अगस्त 2025 को 26 वर्षीय निक्की भाटी की संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर मौत हो गई थी। घटना के बाद निक्की के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज और घरेलू विवाद के चलते हत्या का आरोप लगाया था। मामले ने इलाके में काफी तूल पकड़ा था और पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया था।

पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी पति विपिन भाटी को 23 अगस्त 2025 को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। इसके बाद सास दयावती, ससुर सत्यवीर और जेठ रोहित भाटी को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था।

 

पंचायत में बनी समझौते की राह

निक्की के पिता भिखारी सिंह के अनुसार करीब 20 दिन पहले दोनों पक्षों के बीच पंचायत हुई थी। पंचायत में निक्की के बच्चों के भविष्य को लेकर चर्चा की गई, जिसके बाद समझौते का रास्ता निकला। परिवारों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि बच्चों के नाम संपत्ति की जाएगी और आर्थिक सहयोग भी दिया जाएगा।

 

इसके अलावा निक्की की बहन कंचन को दोबारा ससुराल में रखने पर भी सहमति बनी है। परिजनों का कहना है कि अब वे कोर्ट में एफिडेविट देकर केस वापस लेने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।

 

 

समझौते को लेकर लोगों में अलग-अलग राय

मामले में हुए समझौते को लेकर इलाके में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग इसे न्याय से समझौता बता रहे हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि बच्चों के भविष्य और परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

 

फिलहाल मामला अदालत में लंबित है और आगे की कार्रवाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी।

 

 

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