उत्तर प्रदेश

यूपी पुलिस पर गंभीर आरोप बाराबंकी में दरोगा और इंस्पेक्टर की मिलीभगत से दबंगों ने घर में घुसकर दलित परिवार को लहूलुहान किया, घूसखोरी और एकतरफा कार्रवाई का आरोप

पुष्पेंद्र कुमार संपादक गौतम बुद्ध नगर यूपी

बाराबंकी: उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और जीरो टॉलरेंस की दावों के बीच बाराबंकी जनपद के थाना सुबेहा क्षेत्र से खाकी को दागदार करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक पीड़ित परिवार ने सुबेहा पुलिस के दरोगा (SI) पवन कुमार गुप्ता और इंस्पेक्टर (SHO) बच्चू सिंह यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) से न्याय की गुहार लगाई है। आरोप है कि पुलिस की मिलीभगत से न सिर्फ पीड़ित की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कराया जा रहा है, बल्कि विरोध करने पर दबंगों ने घर में घुसकर पूरे परिवार को लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से पीट-पीटकर लहूलुहान कर दिया।

​क्या है पूरा मामला?

​मामला थाना सुबेहा के ग्राम पूरे शिवा (मजरे अमरवल किरसिया) का है। पीड़ित संजय कुमार पुत्र श्यामलाल के मुताबिक, उनके घर से सटी दीवार पर गांव के ही विपक्षी मनोज कुमार, सुरेश कुमार, सुनील कुमार, दिनेश कुमार और दयाशंकर जबरदस्ती अवैध निर्माण (अतिक्रमण) कर रहे थे। पीड़ित ने इसकी लिखित सूचना पूर्व में ही सुबेहा थाने को दी थी।

​आरोप है कि विवाद सुलझाने के नाम पर हल्के के उपनिरीक्षक (दरोगा) पवन कुमार गुप्ता ने पीड़ित पक्ष से पहले ही ₹10,000 की रकम ऐंठ ली। लेकिन ईमानदारी से कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने कथित तौर पर विपक्षी दल से मोटी रकम लेकर मामले को और सह दे दी।

​रात के अंधेरे में लाठी, डंडे और बल्लम से हमला

​पुलिस के शह से बेखौफ विपक्षियों ने दिनांक 16 जून 2026 की रात करीब 10 बजे लाठी-डंडों, बल्लम और चाकू से लैस होकर संजय कुमार के घर पर धावा बोल दिया। दबंगों ने घर की महिलाओं, बुजुर्ग माता-पिता और बहनों को मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां देते हुए बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। जान बचाने के लिए जब पूरा परिवार घर के भीतर भागा, तो हमलावर घर के अंदर घुस गए और बूढ़े मां-बाप (रामावती व श्यामलाल), बहनों (कंचन व निशा) तथा पत्नी (शिवकुमारी) सहित पूरे परिवार को मरणासन्न कर दिया। मौके पर गांव के जागरूक नागरिकों (नकछेद कुमार और रामकुमार) ने बीच-बचाव कर बमुश्किल पीड़ित परिवार की जान बचाई।

​अस्पताल में भर्ती घायलों का नहीं कराया मेडिकल, पीड़ित पर ही लिख दिया मुकदमा!

​घटना की सूचना पर 108 एम्बुलेंस के जरिए सभी घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हैदरगढ़ में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने सत्ता और पैसे के रसूख के आगे घुटने टेक दिए। सुबेहा पुलिस ने अस्पताल में भर्ती गंभीर रूप से चोटहिल मरीजों का न तो सरकारी मेडिकल परीक्षण कराया और न ही उनकी एफआईआर (FIR) दर्ज की। इसके उलट, दरोगा पवन कुमार गुप्ता और इंस्पेक्टर की कथित मिलीभगत से उल्टा पीड़ित परिवार के खिलाफ ही झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

​गंभीर चेतावनी: ‘अगर कोई अप्रिय घटना हुई, तो जिम्मेदार होंगे दरोगा और इंस्पेक्टर’

​न्याय न मिलता देख पीड़ित संजय कुमार ने बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक महोदय को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच, घायलों के मेडिकल और विपक्षियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

​बड़ा सवाल और चेतावनी: पीड़ित पक्ष और स्थानीय सूत्रों का साफ कहना है कि इस पूरे विवाद और अवैध अतिक्रमण के पीछे सीधे तौर पर दरोगा पवन कुमार गुप्ता और इंस्पेक्टर बच्चू सिंह यादव की मिलीभगत है। पीड़ित ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि पुलिसिया संरक्षण में हो रहे इस अवैध अतिक्रमण के कारण भविष्य में कोई भी अप्रिय घटना या अनहोनी (जैसे हत्या या गंभीर वारदात) होती है, तो इसके सीधे जिम्मेदार और जवाबदेह दरोगा पवन कुमार गुप्ता और इंस्पेक्टर होंगे।

​अब देखना यह है कि बाराबंकी के आला अधिकारी इस गंभीर भ्रष्टाचार और एकतरफा कार्रवाई के आरोपों पर क्या संज्ञान लेते हैं, या फिर सुबेहा पुलिस की इस कार्यप्रणाली के चलते एक गरीब परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकता रहेगा।

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