सेवा की आवाज दबाने की कोशिश लेकिन संघर्ष नहीं रुकेगा सविता शर्मा कासना |
Rahul Kumar Chief Editor News Speed Live

ग्रेटर नोएडा में सफाई कर्मचारियों और समाज के उत्थान की लड़ाई लड़ रहीं समाजसेवी सविता शर्मा कासना ने प्राधिकरण अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह पिछले 15 से 20 वर्षों से मजबूर, शोषित और सफाई कर्मचारियों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष कर रही हैं।

सविता शर्मा कासना ने आरोप लगाया कि जब भी वह सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों तक पहुंचती हैं, तब उन पर झूठे मुकदमे दर्ज करा दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि एक महीने में उन पर पांच मुकदमे दर्ज हुए, तीन बार जेल भेजा गया और 17 दिनों तक जेल में रखा गया। जेल में उन्होंने आमरण अनशन भी किया।

उन्होंने कहा, “अगर समाज की सेवा करना अपराध है, तो मैं यह अपराध अपनी आखिरी सांस तक करती रहूंगी। जेल के दरवाजे खुलवाकर आई हूं, लेकिन गरीबों और सफाई कर्मचारियों की आवाज उठाना नहीं छोड़ूंगी।

सविता शर्मा कासना ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में सफाई कर्मचारियों के शोषण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता, पीएफ में गड़बड़ी होती है और लगातार प्रताड़ित किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांवों से लेकर सेक्टरों तक सफाई कर्मचारियों की भारी कमी है, जबकि गार्बेज गाड़ियों पर एक-एक कर्मचारी से काम कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि गार्बेज गाड़ियों पर कार्यरत सफाई कर्मचारियों को मात्र 14 हजार रुपये वेतन दिया जा रहा है, जबकि प्राधिकरण के नियमों के अनुसार वेतन करीब 21,600 रुपये होना चाहिए।
सविता शर्मा कासना ने कहा कि अधिकारियों की नाक के नीचे सफाई कर्मचारियों का लगातार शोषण होना बेहद शर्मनाक है और यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।




