जय सनातन! जय माँ भगवती! अखिल भारतीय सनातन हिन्दू महासभा के संगठन विस्तार और सनातन धर्म की ध्वजा बुलंद: अखिल भारतीय सनातन हिन्दू महासभा का महासंकल्प
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राष्ट्रवाद और सनातन धर्म के संरक्षण के संकल्प के साथ अखिल भारतीय सनातन हिन्दू महासभा अपने संगठन को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करने की दिशा में अग्रसर है। संगठन की उन्नति, साधु-संतों का सम्मान और महान पूर्वजों के बलिदान को जन-जन तक पहुँचाना ही इस महासभा का मूल ध्येय है। संगठन की शक्ति: नेतृत्व और विजन संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रेखा निषाद के कुशल मार्गदर्शन में महासभा आज देश के कोने-कोने में हिंदुत्व की अलख जगा रही है। उनके नेतृत्व का केंद्र बिंदु केवल संगठन का विस्तार ही नहीं, बल्कि सनातन मूल्यों की पुनर्स्थापना और हिंदू समाज को एक सूत्र में पिरोना है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार सैनी ने संगठन की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाए हैं। हाल ही में उन्होंने पदाधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया:
महापुरुषों का बलिदान: हिंदू धर्म की रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले महापुरुषों के गौरवशाली इतिहास को युवाओं तक पहुँचाना।
साधु-संतों का सानिध्य: संगठन की उन्नति के लिए पूज्य संतों के मार्गदर्शन को प्राथमिकता देना।
संगठन विस्तार: प्रत्येक जिले और गांव स्तर पर कर्मठ और निष्ठावान पदाधिकारियों की नियुक्ति कर ‘सनातन शक्ति’ को जमीनी स्तर पर सक्रिय करना।
हिंदुत्व के प्रति अटूट समर्पण
बैठक के दौरान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार सैनी ने स्पष्ट किया कि संगठन का विस्तार केवल संख्या बल बढ़ाना नहीं है, बल्कि प्रत्येक पदाधिकारी में हिंदुत्व के प्रति सेवा भाव और राष्ट्र प्रथम की भावना जागृत करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सनातन धर्म के प्रति बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिए संगठन का एकजुट और अनुशासित होना अनिवार्य है।
”हमारा लक्ष्य एक ऐसा सशक्त संगठन बनाना है जो न केवल धर्म की रक्षा करे, बल्कि राष्ट्र निर्माण में भी अपनी अग्रणी भूमिका निभाए। डॉ. रेखा निषाद जी के नेतृत्व में हम सनातन की विजय यात्रा को गांव-गांव तक ले जाएंगे।” — पुष्पेंद्र कुमार सैनी (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष)
भविष्य की रणनीति
आगामी दिनों में महासभा द्वारा बड़े स्तर पर सदस्यता अभियान और धर्म संसद जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। संगठन के पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें और उन्हें महासभा की विचारधारा से जोड़ें।
जय सनातन, जय हिंद!




