ग्रेटर नोएडा के किसान 20 सितंबर को करेंगे लखनऊ कूच, चार फीसदी अतिरिक्त भूखंड की मांग को लेकर आर-पार की तैयारी
Rahul Kumar Chief Editor News Speed Live

ग्रेटर नोएडा। जमीन अधिग्रहण के बदले अतिरिक्त आबादी भूखंड की मांग को लेकर ग्रेटर नोएडा के किसानों का आंदोलन अब राजधानी लखनऊ तक पहुंचने जा रहा है। 44 गांवों से जुड़े किसानों ने 20 सितंबर को लखनऊ कूच करने का फैसला लिया है। किसानों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांग रखेंगे और समस्या का ठोस समाधान होने के बाद ही वापस लौटेंगे।
किसानों के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण के बाद उन्हें आबादी भूखंड के रूप में छह फीसदी भूखंड दिया गया, जबकि वे चार फीसदी अतिरिक्त भूखंड की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि लंबे समय से यह मुद्दा प्राधिकरण के सामने उठाया जा रहा है। कई बार धरना-प्रदर्शन और अधिकारियों के साथ वार्ता भी हुई, लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी। अब किसानों ने अपनी आवाज सीधे शासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया है।
सुबह नौ बजे लखनऊ के लिए रवाना होगा प्रतिनिधिमंडल
किसानों की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार 20 सितंबर की सुबह करीब नौ बजे लगभग 150 किसानों का प्रतिनिधिमंडल लखनऊ के लिए रवाना होगा। किसानों के लिए दो बसों की व्यवस्था की गई है, जबकि कुछ किसान अपने निजी वाहनों से भी लखनऊ पहुंचेंगे। वहां मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चार फीसदी अतिरिक्त आबादी भूखंड से जुड़ी मांग को सामने रखने की तैयारी है।
किसानों ने साफ कहा है कि वे केवल ज्ञापन देकर वापस लौटने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि उनकी समस्या का समाधान होता है तो वे वापस आएंगे, लेकिन समाधान नहीं हुआ तो लखनऊ में ही आगे की रणनीति तय की जाएगी और महापड़ाव की स्थिति बन सकती है।
बार-बार आश्वासन के बाद भी समाधान नहीं होने का दावा
किसानों का कहना है कि आबादी भूखंड का मुद्दा लंबे समय से लंबित है। पहले भी किसान प्रतिनिधिमंडल लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों से मुलाकात कर चुका है। जुलाई में एक किसान प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के ओएसडी से भी मिला था और चार फीसदी अतिरिक्त विकसित आबादी भूखंड समेत अन्य शिकायतें रखी थीं। उस समय किसानों को कार्रवाई का आश्वासन मिलने की बात सामने आई थी।
किसानों का कहना है कि लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद जब जमीनी स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो अब उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री के सामने अपनी मांग रखने का निर्णय लिया है।
44 गांवों के किसानों की भागीदारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लखनऊ जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के 44 गांवों से जुड़े किसान शामिल होंगे। किसानों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब गौतमबुद्ध नगर में किसानों की अन्य मांगों को लेकर भी अलग-अलग स्तर पर प्रदर्शन जारी हैं। सितंबर में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण से जुड़ी किसान मांगों को लेकर महापंचायत और धरने हुए हैं। इनमें आबादी के भूखंड, मुआवजा और अन्य अधिकारों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बहिष्कार की चेतावनी
किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वे सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों का सामूहिक बहिष्कार करने पर विचार करेंगे। किसानों का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी जमीन और उससे जुड़े अधिकारों के मुद्दे का समाधान कराना है।
अब सभी की नजर 20 सितंबर के लखनऊ कूच पर है। देखना होगा कि किसानों और शासन के बीच बातचीत किस दिशा में जाती है और चार फीसदी अतिरिक्त आबादी भूखंड की मांग पर क्या निर्णय सामने आता है।




