ग्रेटर नोएडा

पर्यावरण जल और समावेशी समाज — विश्व कल्याण की ओर भारत का संकल्प |

पुष्पेंद्र कुमार संपादक // गौतम बुद्ध नगर यूपी

पूज्य महंत श्री ब्रह्मगिरि महाराज जी की ओर से देशवासियों के नाम यह लेख मात्र एक संदेश नहीं, बल्कि चेतना–जागरण का एक पवित्र आह्वान है। भारत की आत्मा सदा से “वसुधैव कुटुम्बकम्” के शाश्वत सिद्धांत में विश्वास करती आई है, जहाँ सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार माना गया है। आज जब वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संकट, जल अभाव और सामाजिक असमानता जैसी गंभीर चुनौतियाँ मानवता के समक्ष खड़ी हैं, तब भारतवासियों का यह नैतिक दायित्व बनता है कि वे व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर विश्व कल्याण के लिए संगठित और सतत प्रयास करें।

 

भारतीय दर्शन में प्रकृति को माता का स्थान प्राप्त है। वृक्ष, नदियाँ, पर्वत, पृथ्वी और वायु—ये केवल उपभोग की वस्तुएँ नहीं, बल्कि जीवनदायिनी शक्तियाँ हैं। आज पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं रह गई है, बल्कि इसे प्रत्येक नागरिक की साधना बनना होगा। यदि हर व्यक्ति एक वृक्ष लगाए, जल–स्रोतों को प्रदूषण से बचाए और प्राकृतिक संसाधनों का संयमित व विवेकपूर्ण उपयोग करे, तो न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व एक सुरक्षित और संतुलित भविष्य की ओर अग्रसर हो सकता है। निस्संदेह, पर्यावरण की रक्षा ही मानव कल्याण की प्रथम सीढ़ी है।

 

जल जीवन का मूल आधार है। जल के बिना न खेती संभव है, न उद्योग और न ही मानव अस्तित्व की कल्पना। आज जल संकट एक वैश्विक समस्या का रूप ले चुका है। पूज्य महंत जी का संदेश स्पष्ट और प्रेरणादायी है कि वर्षा जल संचयन, नदियों की स्वच्छता, तालाबों और कुओं का पुनर्जीवन जैसे कार्य केवल योजनाएँ न रहें, बल्कि जन–आंदोलन का स्वरूप लें। जब भारत जल संरक्षण और जल प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनेगा, तब वह विश्व को भी इस दिशा में मार्गदर्शन देने में सक्षम होगा। यह सेवा केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आगामी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य हेतु एक पवित्र दायित्व है।

 

इसके साथ ही, समावेशी समाज का निर्माण विश्व कल्याण की सुदृढ़ नींव है। समाज के दिव्यांग बंधु दया के पात्र नहीं, बल्कि समान अधिकारों, अवसरों और सम्मान के अधिकारी हैं। उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराकर हम न केवल उनके जीवन को सशक्त बनाते हैं, बल्कि राष्ट्र की रचनात्मक और उत्पादक शक्ति को भी कई गुना बढ़ाते हैं। जब समाज का प्रत्येक वर्ग आत्मनिर्भर होगा, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा और विश्व के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होगा।

 

पूज्य महंत श्री ब्रह्मगिरि महाराज जी का स्पष्ट संदेश है कि सेवा, संवेदना और समरसता को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया जाए। यदि भारत का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों को समझते हुए पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और सामाजिक समावेशन के लिए समर्पित भाव से कार्य करे, तो भारत निस्संदेह विश्व कल्याण का पथप्रदर्शक बन सकता है। व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर सामूहिक हित में किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

 

अंततः, जब पर्यावरण सुरक्षित होगा, जल संरक्षित होगा और समाज का हर व्यक्ति—चाहे वह सक्षम हो या दिव्यांग—सम्मान, समानता और आत्मगौरव के साथ जीवन जी सकेगा, तभी सच्चे अर्थों में मानवता का कल्याण संभव होगा। यही भारत की सनातन चेतना है और यही विश्व कल्याण की दिशा में भारत का अमिट संदेश।

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